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Thursday, 29 December 2016

सफ़र-कच्छ से घुमक्कड़ी दिल से..का महामिलन-ओरछा तक...

पिछले 5 वर्षो से दिसंबर-जनवरी के महीने मे कही न कही घुमने जाता ही हु.. तो ऐसे ही जनवरी 2015 मे कच्छ मोटरसाइकिल यात्रा पर था. कच्छ यात्रा के दौरान काळाडूंगर मे नीरज जाट भाई से अनायास मुलाकात हो गई,परिचय हुवा,2 दिन साथ घुमे,इंदौर आकर सोशल मिडिया पर पता चला,यह मनमौजी(नीरज) तो घुमक्कड़ी की दूनिया का ध्रुवतारा है...।
इसके बाद इस मनमौजी घुमक्कड़ से प्रगाढ़ मित्रता हुई,साथ साथ घुमना भी चलता रहा.. जनवरी 2016 मे हम दोनों किन्नौर-स्पीति की यात्रा पर थे... तब ये महाशय एक  व्हाट्सएप्प ग्रुप-घुमक्कड़ी दिल से..पर लगे रहते थे..तब ही मन बन गया था,घुमक्कड़ी दिल से...से जुड़ने का.. यात्रा से वापस आते ही,इस ग्रुप के फेसबुक पेज से जुड़ा,और फिर व्हाट्सएप्प ग्रुप से जुड़ने के लिए इच्छा जाहिर कर दी,मेरी पुकार प्रकाश यादव जी ने सुन ली और जुड़वा दिया व्हाट्सएप्प ग्रुप से भी।
ग्रुप मे आते ही देखा यहाँ हर उम्र वर्ग के कई ब्लॉगर,फोटोग्राफर, घुमक्कड़ शामिल है.. सभी से अनोपचारिक परिचय हुवा... सभी का एक शौक था...घुमना.. तो बस यहाँ मन लग गया.. यहाँ घुमने की बातों के साथ एक दुजे की टांग खिंचाई चलती रहती है...
मस्ती मस्ती मे ही नवम्बर 2016 मे,ग्रुप के सदस्य विनोद गुप्ता भाई और योगेश सारस्वत जी ने मिलकर प्रस्ताव रख दिया की हो जाय.. एक महामिलन औरछा (झाँसी) मे... महामिलन की तारीख़ एकमत से 24-25 दिसंबर 2016 पक्की हो गई।
आमतौर पर विनोद भाई अपनी मायानगरी से बहार नहीं निकल पाते है, इसलिये महामिलन मे उनके शामिल होने पर यकीन करना किसी के लिए भी आसान नहीं था,इसी कारण से नीरज भाई ने विनोद भाई को उकसाया की आप नहीं आ पावगे.. तो अन्य सदस्य भी कहने लगे, विनोद भाई करवा लो रेलवे आरक्षण,तो विनोद भाई ने अगले दौ तीन दिन बाद ही ओरछा आने के लिए रेलवे टिकीट का आरक्षण करवा लिया...
बस फिर क्या था,बाक़ी सभी सदस्यों भी लग गये ओरछा आने की तैयारी मे,और घुम्मकड़ी दिल से..मे अब बस केवल ओरछा महामिलन के सपने संजोये जाने लगे।
वही मुझे 14 दिसंबर से नीरज भाई के साथ राजस्थान-थार मोटरसाइकिल यात्रा पर जाना था,वापसी का कुछ निश्चित नहीं था कब होगी,तो ओरछा महामिलन के लिए सोच लिया था,जब जाना होगा, चले जायँगे,इंदौर से ओरछा 550 किलोमीटर के आसपास ही है, भोपाल से झाँसीे की खुब रेलगाड़ी मिल जाती है,आरक्षण की भी कोई जरूरत नहीं है,जाना हुवा तो चल पड़ेंगे,रेलवे के जनरल डिब्बों के भी मज़े ले लेंगे।
ऐसा सोचकर चला गया थार-राजस्थान... थार यात्रा 14 दिसंबर को शुरू हो गई,घूमते घामते 20 दिसंबर की रात नीरज एंड फैमली के साथ रामदेवरा रुके,आगे का प्रोग्राम यह था कि,21 दिसंबर को बीकानेर रूककर,22 को मे इंदौर और नीरज भाई दिल्ली की और चले जायँगे..
21 की दोपहर बीकानेर पहुँचे,अब यहाँ से देशनोक-करणी माता के लिए रवाना हुवे ही थे कि, अचानक एक चौराहे पर मोटरसाइकिल रोककर नीरज भाई कहने लगे,भाई अब में दिल्ली जा रहा हु,में 22 को दिल्ली पहुँच कर एक एक्स्ट्रा ड्यूटी करना चाहता हु,जिससे 24-25 को ओरछा महामिलन मे शामिल हो पाउ..मेरी भी महामिलन मे शामिल होने की प्रबल इच्छा है...अब ओरछा मे मिलेंगे,दोनों के फ़ोटो वीडियो भी एक दुजे के पास है, उसका आदान-प्रदान भी वही करेंगे। और हो गई टाटा टाटा,बाय बाय...
में 21 दिसंबर की रात पुष्कर रुकते हुवे,22 दिसंबर की रात इंदौर आ गया... इंदौर पहुँचने पर मेरी स्थित यह थी कि  क्लीनिक 10 दिनों से बंद है, मरीज़ परेशान हो रहे थे.. ओरछा जाने का बिल्कुल मन नहीं था,क्योकि जाता हु तो क्लीनिक अब 26 दिसंबर को खुल पायेगा,बाकि महामिलन मे आने वाले जितने अनजाने दोस्त है, सब अपने बन जायँगे... (मुझे अनजाने दोस्त बहुत पसन्द है।) लेकिन एक लालच था कि नीरज से फ़ोटो और विडीयो का बेशकीमती डाटा भी लेना है...
तो सभी नुकसान की परवाह किये बगैर 23 दिसंबर की रात चल पड़ा भोपाल के रास्ते ओरछा (झाँसी) के लिए... 24 को ओरछा पहुँचने पर नीरज का मेसेज आ गया,ऑफिस मे सभी पहले से छुट्टी पर चले गए, उनकी शिफ्ट भी मुझे करना है,छुट्टी नहीं मिल पा रही है, नहीं आ पाउँगा.. यह सुनकर बहुत निराश था,निराशा की वजह यह नहीं थी कि थार के फ़ोटो नहीं मिल पायँगे... बल्कि यह थी कि घुमक्कड़ी के ध्रुव तारे,मनमौजी दोस्त के साथ एक दिन और बिताने का मौका गया.. मुझे यह भी देखना था कि इस मनमौजी इंसान का,अपने चाहने वाले और मौजमस्ती मे टांग खिंचाई करने वालो से कैसा मेलजोल होता है... लेकिन अब यह सब नहीं होना था...
इन सब बातों को भूलकर में दबे मन से महामिलन की हाहाहा,हीहीही मे कही खो गया... मुकेश पाण्डेय जी ओरछा महामिलन के व्यस्थापक थे,उनकी हर व्यवस्था मानो यह कह रही थी कि ऐसे ही किसी को भी व्यवस्थापक नहीं बना देते है... खाने की विवधता से लेकर ठहरने की व्यवस्था सब कुछ चाकचौबंद था... कुल मिलाकर ओरछा मिलन यादगार रहा। यहाँ सुशांत सिंघल जी,नटवर भाई,पंकज भाई जैसे वरिष्ठ फोटोग्राफर थे। तो बिनु भाई जैसे ट्रैकर,अपने ज़माने के जानेमाने ब्लॉगर भालसे जी,तो जगत बुवा दर्शन जी भी थी। वही इन सब के बीच कौशिक जी बता रहे थे कि यूँही किसी को एडमिन नहीं बना देते है। आई.टी एक्सपर्ट प्रकाश यादव जी भी थे,तो नए ज़माने के ब्लॉगर आर.डी भाई और सचिन त्यागी जी और कमल भाई भी थे।
इन सभी के साथ सचिन जांगड़ा की गाड़ी न्यू ही चाल रही थी..और विनोद को हर कोई पीटने मे लगा था। सूरज मिश्रा,डॉ.प्रदीप त्यागी,चाहर साहब,प्रतिक भाई,मनोज भाई भी सभी से हँसते हँसते मिल जुल रहे थे... बस संदीप मन्ना, रजत शर्मा,संजय सिंह जी,हेरी भाई,अलोक जी,सहगल जी और में ही थोड़े से  खामोश थे... रूपेश भाई कमरों का आवंटन करने मे लगे रहे।
वैसे तो में महिलाओं के बीच गया नहीं,फिर भी मैने श्रीमती हेमा,श्रीमती कविता भालसे,श्रीमती आभा त्यागी,श्रीमती नीलम कौशिक,श्रीमती नयना यादव,श्रीमती रश्मि गुप्ता जी को मैने यह तक कहते सुना की रोमेश जी उर्फ़ तात श्री,सुशांत सिंघल जी उर्फ़ ताऊ,और दर्शन जी उर्फ़ बुआ,अपने आप को 21 की उम्र का साबित करने मे लगे है...😁😁
बच्चा पार्टी को भी देख कर लग रहा था इनमे से भविष्य मे कई भावी घुमक्कड़,फोटोग्राफर,और कुछ इसी ग्रुप के एडमिन बनेंगे, इनमे शामिल थे..
देवांग त्यागी,युवराज कौशिक,अंशुल कौशिक,अक्षत गुप्ता,अंशिता गुप्ता,इशिका यादव,अंशिका यादव,कुणाल सिंह,साक्षी सिंह ने भी बहुत धमाल मचाया... हेमा जी की नन्ही सी साक्षी ने तो सभी को मोहित कर रखा था।
बाहेती जी भी आँधी की तरह आये और तूफ़ान की तरह चले गए। फिर तो सभी मे वापस जाने की होड़ सी मच गई,फिर हम भी चल पड़े...और कह दिया अलविदा ओरछा...😢😢
महामिलन मे मिलन अनजान से अपने बनने वाले मित्र है..
1.सचिन कुमार जांगड़ा
2.हरेंद्र भाई
3.सूरज मिश्रा
4.मुकेश पाण्डेय जी और अनिमेष बाबू
5.रूपेश शर्मा जी
6.रितेश गुप्ता जी सपरिवार
7.संजय कौशिक जी सपरिवार
8.सुशांत सिंघल जी
9.रोमेश शर्मा जी
10.बिनु भाई
11.नरेश सहगल जी
12.कमल सिंह भाई
13.डॉ प्रदीप त्यागी जी
14.नटवर भाई
15.संजय सिंह जी
16.हेमा जी
17.मुकेश भालसे जी सपरिवार
18.विनोद भाई
19.प्रतिक भाई
20.बुआ जी
21.मनोज़ भाई
22.आलोक जी
23.सचिन त्यागी जी सपरिवार
24.सत्यपाल चाहर सहाब
25.नरेश चौधरी जी
26.संदीप मन्ना भाई
27.किशन बाहेती जी
28.रजत शर्मा
29.आर.डी भाई
30.प्रकाश यादव जी सपरिवार
देवेन्द्र कोठारी जी, महेश सेमवाल जी, योगी जी, प्रतिमा जी, हर्षिता जी, कपिल जी,प्रदीप जी,सुशिल जी,राजेश जी,संतोष तिड़के जी,अमित गोडा जी,अनिल भाई,चंद्रेश जी समेत अन्य कई सदस्य भी महामिलन मे शामिल नहीं हो पाये... सभी की कमी खली...

यहाँ पर क्लिक करवाना कैसे कोई छोड़ सकता था।

औरछा का सिग्नेचर क्लिक...बेतवा नदी और क्षत्रियो का दृश्य


एडमीन जी कहते हुवे...रे भाई यु ही किसी को एडमिन नहीं बना देते है...😊



घुमक्कड़ी दिल से ... मिलेंगे फ़िर से



नीरज और सुमित स्पीति में...

घुमक्कड़ी दिल से ... सावन भादो के साये में

सेल्फी एक्सपर्ट पंकज शर्मा के साथ सभी घुमक्कड़

सबसे आखिरी में आये किशन बाहेती जी के साथ ग्रुप फोटो

यहीं था 24 और 25 को सभी का ठिकाना

हाल ही की थार यात्रा के दौरान परम मित्र नीरज के साथ

24 की रात की थाली

हमारे तातश्री सुबह-सवेरे अपनी ही दुनिया में

25 दिसंबर का खास भोजन


इंदौरी पोहा, ओरछा की गुझिया और आगरा का पेठा - अदभुत संगम


कान्फ्रेंस हाल में - घुमक्कड़ी दिल से

पांडेय जी और कौशिक जी अपने ही मूड़ में


नरेश सहगल जी बी.एस.एन.एल.सिग्नल की खोज में




छोटे कौशिक जी युवराज

ब्लॉगर श्रीमति कविता भालसे जी

सचिन त्यागी जी के सुपुत्र देवांग त्यागी

मुंबई के नकली डॉन विनोद गुप्ता जी
सभी फ़ोटो साभार घुमक्कड़ी दिल से प्राप्त किये ।